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दोषी शिक्षक निलंबित, हड़कम्प

दोषी शिक्षक  निलंबित, हड़कम्प

बीईओ की रिपोर्ट पर बीएसए ने की सख्त कार्रवाई

जौनपुर। बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ गोरखनाथ पटेल ने बताया कि केराकत ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी की व्याख्या के अनुक्रम में दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। बीएसए डॉ पटेल ने इस मामले में  दोषी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के बाद जिले के अन्य शिक्षकों को भी कड़ी हिदायत जारी कर दिया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की कोई घटना नहीं होनी चाहिए।

ये था पूरा मामला

परिजनों ने शिक्षक पर लगाया बच्चे को मारने पीटने का आरोप,विद्यालय का किया घेराव

केराकत ,जौनपुर। स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है जहां अध्यापक गुरु होता है जो बच्चो को शिक्षा देने का कार्य करता है मगर उसी स्कूल के अध्यापकों के द्वारा अगर बच्चों को जाति पाति के बंधन में बाटा जाय तो आप क्या कहेंगे।ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है

स्थानीय क्षेत्र के औवार गांव में स्थित कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय में सोमवार की सुबह अध्यापक द्वारा एक दलित छात्र को मारने पीटने को लेकर परिजनों ने विद्यालय का घेराव कर अध्यापक पर उचित कार्यवाही करने की मांग को उठाई।

गौरतलब हों कि शनिवार के दिन अध्यापक सुरेश पाल ने छात्रों में हुए विवाद को लेकर आठवीं के छात्र को बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया जिसको लेकर सोमवार की सुबह पीड़ित छात्र के परिजनों ने विद्यालय पहुंच अध्यापक के खिलाफ जमकर हंगामा किया।छात्र के पिता भईयालाल ने बताया कि अध्यापक सुरेश पाल औवार गांव के ही निवासी है जो की गलत भावना से प्रेरित होकर मेरे बेटे को बुरी तरह पिट दिया,सर व हाथ में गंभीर चोट आई है। घायल बेटा घर आया और रो रोकर पूरी बात बताई।दर्द होने के कारण कुछ दर्द निवारक दवा दी गई।शनिवार को ही अध्यापक के खिलाफ चौकी पर तहरीर दी गई थी मगर दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अध्यापक के ऊपर कोई कार्यवाई नहीं की।तत्पश्चात सुबह विद्यालय पहुंच कर घेराव किया गया है।ग्रामीणों व भईया लाल ने एक पत्र बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौप आरोप लगाया की विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमित सिंह है जो की विद्यालय आते ही नहीं. अपना कार्यभार सुरेश पाल को दिए है,जिससे मनमानी करते है,जातिवाद करते है।मिली जानकारी के अनुसार शाम साढ़े पांच बजे खबर लिखे जाने तक छात्र समेत परिजन थाने में बैठे रहे न ही उनका मेडिकल कराया गया और न ही मुकदमा लिखा गया।जो पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है तो वही अध्यापक मौके से फरार है ।

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