कांशीराम शहरी आवास योजना बनी ‘किराया कालोनी
प्रशासन की अनदेखी से बाहरी तत्वों का सेफ ज़ोन, स्थानीयों में बढ़ी चिंता
✍️रिपोर्ट:नौशाद मंसूरी
शाहगंज (जौनपुर)। आज़मगढ़ रोड स्थित बहुजन समाज पार्टी सरकार की महत्वाकांक्षी कांशीराम शहरी आवास योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है। जिन गरीब एवं पात्र परिवारों के लिए यह योजना बनाई गई थी, उन्हीं लाभार्थियों ने अब अपने आवासों को धड़ल्ले से किराए पर उठाकर पूरी कालोनी को ‘किराया हब’ में बदल दिया है।
*लाभार्थियों के मकान बने आय का साधन, योजना का उद्देश्य ध्वस्त*
योजना के अंतर्गत आवास पाने वाले अधिकांश लाभार्थी स्वयं उन घरों में न रहकर उन्हें मोटे किराए पर चढ़ा चुके हैं। इससे न सिर्फ सरकारी योजना की मंशा पर पानी फिर गया है, बल्कि कालोनी का वातावरण भी पूरी तरह बदल गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, “कालोनी में चयनित लाभार्थियों की तुलना में बाहर के जिलों से आने वाले किराएदार अधिक रहते हैं। कई लोग तो इन मकानों को स्थायी आवास मानकर वर्षों से डटे हुए हैं।”
अराजक तत्वों का जमावड़ा, अपराध बढ़ने का खतरा
चिंता की बात यह है कि कुछ आवास अराजक तत्वों के ठिकाने बन चुके हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात के समय संदिग्ध गतिविधियाँ आम हो चली हैं और कुछ मामलों में किराए पर रहने वाले लोग आपराधिक घटनाओं में भी लिप्त पाए गए हैं।
“रात के समय कालोनी में बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। कई बार झगड़े, शराबखोरी और संदिग्ध गतिविधियाँ भी देखी गई हैं,” एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।
*प्रशासन की उदासीनता, न निरीक्षण न कार्रवाई*
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से न तो कोई प्रशासनिक टीम जांच करने आई और न ही लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन हुआ। प्रशासन की इस लापरवाही से किराए पर देने वालों का मनोबल और बढ़ गया है तथा कालोनी धीरे-धीरे ‘गैरकानूनी किराया बाजार’ बनती जा रही है।
*आमजन परेशान, सुरक्षा पर सवाल*
योजना के तहत बनी कालोनी में रहना अब मूल लाभार्थी परिवारों के लिए चुनौती बन गया है। बाहरी तत्वों की बढ़ती संख्या के कारण महिलाएँ और बुजुर्ग अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
एक महिला निवासी ने कहा, “हम लोग डर-डर कर रहते हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। कई बार शिकायत की पर कार्रवाई नहीं हुई।”
*क्या कहा अधिकारियों ने*
इस सम्बंध में सम्बन्धित अधिकारियों से सम्पर्क का प्रयास किया गया तो पता चला की नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी प्रदीप गिरी मेडिकल लीव पर है।
इंचार्ज जे ई संजीव यादव से बात की गई तो उन्होंने किसी तरह की जानकारी न होने का हवाला दिया।
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