कवि सत्येन्द्र उपाध्याय के द्वारा गंगा के सौंदर्यता पर लिखी गयी कविता सोशल मीडिया पर वायरल....
शीर्षक-
माँ गंगा ...
हवा संग बहती यह गंगा ,
सुन्दर पुलिन सलोना सा,
भिनसार होत किरणें फैले,
जल कर देती सोना सा।
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शीतलता को धारण कर,
जब पवन समाए श्वासो मे,
अद्वितीय सा सुख मिलता,
चैतन्य बँधे जल पाशो मे।
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नर पशु पक्षी तृप्त भये ,
स्नान करें सूरज तारा ,
आसमान भी नहा लिया ,
पवित्र गंग की जल धारा।
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तन बाहर मन डूब रहा ,
डूब रहा मन का काजल,
जल तरंग की थपकी से ,
सो रहा कवि, माँ के आँचल।
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सत्येन्द्र प्रताप उपाध्याय
पूरा पढ़ने के लिए बहुत बहुत आभार 🙏🙏
2 टिप्पणियाँ
बहुत खूब
जवाब देंहटाएंSo nice line
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