शाहगंज में भू-माफियाओं का बढ़ता जाल, गरीबों के घर का सपना बन रहा दुःस्वप्न
विवादित व फर्जी जमीनों की खुलेआम बिक्री, आसमान छूते दाम और प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
रिपोर्ट:नौशाद मंसूरी✍️
शाहगंज (जौनपुर)। एक आम आदमी अपने जीवन में रोटी, कपड़ा और मकान—इन तीन बुनियादी जरूरतों का सपना जरूर देखता है। रोटी और कपड़े का किसी न किसी तरह इंतजाम हो जाता है, लेकिन सिर पर छत का सपना पूरा करना आज के समय में गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सबसे कठिन हो गया है। वर्षों तक पाई-पाई जोड़कर जब कोई व्यक्ति जमीन खरीदने की हिम्मत करता है, तभी भू-माफियाओं का जाल उसे अपने शिकंजे में ले लेता है।
नगर और आसपास के इलाकों में कथित भू-माफिया गरीबों व मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ते प्लॉट और मकान का सपना दिखाकर विवादित और फर्जी जमीनें बेच रहे हैं। नियम-कानून को ताक पर रखकर ये लोग ऐसी जमीनों की रजिस्ट्री करा देते हैं, जिन पर पहले से विवाद या न्यायालय में मामला लंबित होता है। सच्चाई तब सामने आती है, जब खरीदार जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करता है और कोई अन्य व्यक्ति जमीन पर अपना दावा ठोक देता है या कोर्ट केस का हवाला देकर काम रुकवा देता है।
भू-माफिया जमीन बेचने से पहले स्कूल, पार्क, अस्पताल, धार्मिक स्थल जैसी सुविधाओं का सब्जबाग दिखाते हैं, लेकिन हकीकत में ये दावे केवल कागजों तक ही सीमित रहते हैं। एक बार जमीन विवादित घोषित हो जाए, तो खरीदार को अदालत और राजस्व विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं। वर्षों बीत जाते हैं, चप्पल घिस जाती है, लेकिन न्याय मिलना आसान नहीं होता।
हैरानी की बात यह है कि प्रशासन और शासन का ध्यान इन भू-माफियाओं पर शायद ही कभी जाता है, जिससे इनके हौसले बुलंद हैं। नगर पालिका और उससे सटे क्षेत्रों में जमीनों के दाम इस कदर बढ़ चुके हैं कि वे जमीन नहीं, बल्कि कोहिनूर हीरा प्रतीत होती हैं। वर्तमान में यहां जमीनों की कीमत एक लाख रुपये से लेकर तीन लाख रुपये प्रति फुट तक पहुंच चुकी है।
इतना ही नहीं, भू-माफिया स्टांप और रजिस्ट्री में कम मूल्य दिखाकर राजस्व विभाग को भी चूना लगा रहे हैं। फर्जी बैनामे, विवादित जमीनों की बिक्री और बेतहाशा बढ़ती कीमतें प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
सबसे ज्यादा मार उस आम आदमी पर पड़ रही है, जो जीवन भर की कमाई लगाकर अपने सपनों का घर बनाना चाहता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन भू-माफियाओं पर शिकंजा कसेगा, या गरीबों का घर का सपना यूं ही भू-माफियाओं की भेंट चढ़ता रहेगा?
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