Header Ads Widget

पुलिस की मनमानी पर हाईकोर्ट सख्त

पुलिस की मनमानी पर हाईकोर्ट सख्त 

तत्कालीन उपनिरीक्षक के वेतन से कटेंगे 10 हजार रूपए 

मालिक को तुरंत गाड़ी लौटाने का आदेश

रिपोर्ट : मोहम्मद असलम खान

केराकत, जौनपुर । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की मनमानी कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय ने केराकत थाने में बिना किसी ठोस कारण के महीनों से बंद ऑटो रिक्शा को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही, इस मामले में दोषी पाए गए तत्कालीन उप-निरीक्षक (SI) सुनील कुमार के वेतन से 10 हजार रूपए की कटौती कर याचिकाकर्ता को देने का निर्देश दिया है।

​केराकत तहसील के ग्राम दुगौली निवासी सुधांशु पुत्र स्व. रामचंद्र का ऑटो संख्या UP 62 BT 5203 16 जुलाई 2025 को केराकत थाना पुलिस ने जब्त कर लिया था। पुलिस का दावा था कि वाहन लावारिस स्थिति में मिला था। जबकि वाहन स्वामी सुधांशु का कहना था कि वह लगातार जरूरी कागजात लेकर थाने के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन पुलिस बिना किसी कोर्ट ऑर्डर के गाड़ी छोड़ने को तैयार नहीं थी।
जिसके बाद सुधांशु ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई करते हुए ​माननीय न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की अदालत ने पाया कि वाहन किसी भी अपराधिक गतिविधि में संलिप्त नहीं था। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस को किसी का वाहन बिना किसी कानूनी आधार के अपनी मर्जी से कब्जे में रखने का कोई अधिकार नहीं है।

​अदालत ने पुलिस को ​वाहन की तुरंत रिहाई का आदेश तो दिया ही साथ ही मनमानी करने वाले तत्कालीन उप-निरीक्षक सुनील कुमार के वेतन से ₹10,000 काटकर याचिकाकर्ता को भुगतान करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि वाहन स्वामी मांग करता है तो वाहन को अवैध रूप से बंद रखने के कारण हुए नुकसान के लिए संबंधित अधिकारियों को हर्जाना देना होगा। 

​​हाईकोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद, सुधांशु आज गुरुवार को केराकत थाने पहुंचा और मौजूदा प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार पांडेय से अपनी गाड़ी और जुर्माने की राशि दिलाने की गुहार लगाई है। इस संदर्भ में केराकत थाना प्रभारी अरविंद कुमार पांडेय ने कहा कि सुधांशु को उसकी गाड़ी सौंपी जा रही है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ