प्रेस परिषद ने पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने पर दिखाया तेवर
यूपी के मुख्य सचिव समेत डीएम, एसपी को नोटिस भेजकर मांगा जवाब
✍️रिपोर्टर-मोहम्मद असलम खान
केराकत, जौनपुर। गौशाला में गायों के मरने की खबर यू—ट्यूब चैनल पर दिखाने और छापने के बाद पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के मामले में भारतीय प्रेस परिषद ने कड़ा तेवर दिखाया है
परिषद के सचिव नंगसंगलेम्बा आओ ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता में अंकुश मानते हुये चिन्ता जतायी। साथ ही परिषद ने दो सप्ताह के भीतर सूबे के मुख्य सचिव, सचिव (गृह) पुलिस विभाग, पुलिस महानिदेशक व जौनपुर के डीएम एसपी को नोटिस जारी कर उनसे कारण पूछा है।
दरअसल बीते 21 मार्च को पत्रकार आदर्श मिश्रा सहित केराकत तहसील क्षेत्र के पत्रकार पंकज सिंह, विनोद कुमार और अरविन्द यादव मुफ़्तीगंज विकास खण्ड क्षेत्र के पेसारा गांव में स्थित अस्थायी गौशाला की दुर्दशा का न्यूज कवर करने वहां पहुंचे। पत्रकारों के अनुसार गौशाला में दो गायें मरी पड़ी थीं और इतनी ही मरणासन्न थीं जिन्हें कौवे नोच रहे थे। वहीं गौशाला में गायों के बीच गोबर की मोटी परत जमी पड़ी थी। पत्रकारों ने मौके का फोटो लिया और वीडियो क्लिप बनाया तथा वहीं से उपजिलाधिकारी केराकत नेहा मिश्रा को गौशाला की स्थिति से अवगत कराते हुये उनका पक्ष भी जाना।
पत्रकारों के अनुसार उपजिलाधिकारी का जवाब काफी तल्ख़ था। बहरहाल पत्रकारों ने उक्त समस्या को अपने स्तर से प्रकाशित कर दिया। 3 दिन बाद यानी 24 मार्च को तहसील के जिम्मेदार अधिकारियों ने उक्त गांव की प्रधान चंदा देवी पर दबाव बनाकर उपरोक्त पत्रकारों के खिलाफ केराकत थाने में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3 (2) सहित आईपीसी की धारा 504, 506, 384 और 429 के तहत मुकदमा दर्ज करवा दिया।
इस मामले को संज्ञान में लेते हुए भारतीय प्रेस परिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, सचिव (गृह) पुलिस विभाग, पुलिस महानिदेशक समेत जौनपुर के डीएम, एसपी को नोटिस भेजते हुये 2 सप्ताह के अन्दर अपनी बात कहने की बात कही है। भारतीय प्रेस परिषद की इस कार्रवाई से सूबे के प्रशासनिक अमले में जबरदस्त हड़कंप मचा है।
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